आँखों में आँसू, चेहरे पर पीड़ा और मन में अपार वेदना… यह दृश्य हर सनातनी का हृदय झकझोर देने वाला है। बिना स्नान किए लौटते समय स्वामी बालमुकुंदानंद जी महाराज की आँखों में छलकते आँसू उस दर्द को बयां कर रहे हैं, जिसे शब्दों में कहना कठिन है। यह केवल एक संत का दुख नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का आहत होना है
जिस भूमि पर गंगा स्नान और साधना के लिए आए थे, वहीं अपमान और पीड़ा मिली — यह क्षण भयभोर और हृदयविदारक है। यह तस्वीर इतिहास में आस्था के अपमान और संत समाज की पीड़ा का प्रतीक बनकर रहेगी।